रवि शास्त्री का कोच बनना ‘विराट’ जीत और धोनी युग का अंत है !

इमोशन, ड्रामा और सस्पेंस… अगर ये सब एक साथ एक ही फ़िल्म में हो तो समझो पिक्चर सुपर डूपर हिट है। सिर्फ़ फ़िल्म तक ही ये सीमित नहीं है क्रिकेट के मैदान में भी ये तीनों चीजों का मिश्रण रोमांच को चरम पर पहुंचा देता है। लेकिन फ़िलहाल तो मैदान से बाहर टीम इंडिया के कोच के चयन में ये सब हावी रहा और नतीजा रवि शास्त्री के तौर पर भारतीय क्रिकेट टीम को मिल गया नया कोच।

थोड़ा फ़्लैशबैक में चलते हैं फिर शास्त्री के कोच बनने के शस्त्र और बीसीसीआई के बॉस का ड्रामा भी जानेंगे। आज से क़रीब 13 महीने पहले टीम इंडिया के कोच के लिए एक हाईटेक कमिटी जिसे सलाहकार समिति भी कहते हैं, उसमें मौजूद तीन सदस्यों (सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण) ने कई आवेदनों को देखने के बाद और इंटरव्यू लेते हुए अनिल कुंबले को कोच पद पर नियुक्त कर दिया।

भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल गेंदबाज़ और एक बेहतरीन क्रिकेटिंग ब्रेन रखने वाले अनिल कुंबले के कोच बनने को कप्तान विराट कोहली से लेकर हरेक क्रिकेट फ़ैन्स तक ने सराहा। लेकिन तब एक और आवेदक रवि शास्त्री को इसमें पक्षपात की बू नज़र आई और उन्होंने आरोप सलाहकार समिती पर ख़ास तौर से उनमें मौजूद सौरव गांगुली पर मढ़ दिया। दादा और शास्त्री में कुछ दिनों तक वाद-विवाद का सिलसिला चलता रहा और आख़िरकार टीम इंडिया के मैदान में शानदार खेल ने उनपर विराम लगाते हुए फ़ोकस क्रिकेट पर कर दिया था।

लेकिन भावनाएं कोहली की भी आहत हुईं थी क्योंकि उनकी भी पहली पसंद रवि शास्त्री ही थे पर तब सलाहकार समिति के सामने कोहली की पूरी तरह से नहीं चली थी। कोहली के ख़राब फ़ॉर्म को टीम इंडिया के डायरेक्टर रहते हुए रवि शास्त्री ने अपनी टिप्स और सलाह से इंग्लैंड दौरे पर बेहतर कर दिया था, यही वजह थी कि कोहली के दिल में शास्त्री के लिए एक सॉफ़्ट कॉर्नर तो था ही।

यही सॉफ़्ट कॉर्नर धीरे धीरे अनिल कुंबले के लिए सख़्त होता जा रहा था, ऊपर से सीनियर खिलाड़ियों को कुंबले का इज़्ज़त देना कोहली को नागवार गुज़र रहा था। कोहली जहां युवा खिलाड़ियों की पौध बढ़ाना चाहते थे तो कुंबले ने गौतम गंभीर और पार्थिव पटेल से लेकर दिनेश कार्तिक जैसे पुराने और अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी टीम इंडिया में कराई।

कौन सा खिलाड़ी टीम में रहेगा ? कौन खिलाड़ी कब क्या करेगा ? कौन कब सोएगा और कौन कितनी देर प्रैक्टिस करेगा ? अनुशासन पसंद कुंबले की ये चीज़ें अब आज़ाद ख़्याल और बिंदास रहने वाले कोहली को खटकने लगी थी। चिंगारी शोले में तब भड़क गई जब बीसीसीआई के सालाना कॉन्ट्रैक्ट में भी उन्होंने कोहली के न चाहते हुए पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को ग्रेड ए में रखा।

एक दूसरे के लिए नाराज़गी और दूरी बढ़ती जा रही थी, कहा जाता है कि कई महीनों तक दोनों आपस में बात नहीं करते थे और इसका असर ज़ाहिर तौर पर टीम के प्रदर्शन पर भी पड़ता था। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी से पहले जब ये बात मीडिया के सामने लीक हुई थी, तब पहले तो इसको खंडन किया गया, लेकिन पाकिस्तान के ख़िलाफ़ फ़ाइनल में मिली हार ने भावनाएं बाहर ला दीं। कोच और कप्तान के बीच महीनों की शांति तू तू मैं मैं और गाली गलौज तक जा पहुंची। जिसके बाद कुंबले ने कोच पद से इस्तीफ़ा दे दिया और वेस्टइंडीज़ दौरे पर भी जाने से मना कर दिया।

कुंबले ने एक चिट्ठी भी लिखी जिसमें कप्तान कोहली पर सीधे तौर पर आरोप लगाया और उनके साथ काम करना बेहद मुश्किल बताया। सचिन, दादा और लक्ष्मण वाली सलाहकार समिति ने सुलह कराने की कोशिश तो पूरी की लेकिन आग की लपटें इतनी तेज़ थी की उसकी चपेट में कोई भी आ सकता था लिहाज़ा नए सिरे से आवेदन और इंटरव्यू का दौर शुरु हुआ।

कोच पद के लिए टॉम मूडी, वीरेंद्र सहवाग (सौरव गांगुली की गुज़ारिश पर), रिचर्ड पायबस और लालचंद राजपूत जैसे दिग्गजों ने आवेदन दिया और आख़िरी तारीख़ ख़त्म हो गई थी। यहां से आता है कहानी में ट्विस्ट जब कोच पद के लिए आवेदन न करने पर एक नीजि चैनल के सवालों का जवाब देते हुए शास्त्री ने कहा कि, ‘’इस बार मैं लाइन में लग कर इंटरव्यू देने तो नहीं जाउंगा, उन्हें लगता है कि मुझे कोच बनना चाहिए तो वह ख़ुद बुलाएंगे।‘’

रवि शास्त्री की नाराज़गी को देखते हुए सचिन तेंदुलकर ने उन्हें मनाया और फिर बीसीसीआई की तरफ़ से तारीख़ में फेरबदल किया गया जिसके बाद शास्त्री ने आवेदन दाख़िल किया। 10 जुलाई को सभी का इंटरव्यू हुआ और फिर ये कहा गया कि विराट कोहली की राय के बाद आख़िरी फ़ैसला सुनाया जाएगा। शायद दादा की ये प्रतिक्रिया सहवाग भांप गए और इंटरव्यू के ठीक बाद छुट्टियां मनाने के लिए कनाडा रवाना हो गए और तभी ये क़यास लग चुका था कि कप्तान की राय का मतलब है रवि शास्त्री का नया कोच बनना तय है।

मंगलवार को दिन में ये ख़बर भी आ गई कि रवि शास्त्री कोच बनाए गए, और एक बार फिर जीत विराट कोहली की हुई। लेकिन बीसीसीआई ने इस पर सस्पेंस बनाए रखा और कहा कि अभी कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है पर कुछ घंटो बाद टीम इंडिया के बॉस विराट कोहली के चहेते रवि शास्त्री के नाम पर बीसीसीआई का आधिकारिक ऐलान भी हो गया।

रवि शास्त्री को 2019 वर्ल्डकप तक के लिए टीम का हेड कोच नियुक्त कर दिया गया, जबकि ज़हीर ख़ान और राहुल द्रविड़ को भी बड़ी भूमिका मिल गई। ज़हीर टीम इंडिया के नए गेंदबाज़ी कोच होंगे और द्रविड़ भारतीय क्रिकेट टीम के विदेशी दौर पर बल्लेबाज़ी सलाहकार।

शास्त्री का कोच बनना जहां विराट कोहली की जीत के तौर पर देखा जा रहा है तो इसे धोनी के युग का अंत भी माना जा रहा है। क्योंकि जब शास्त्री टीम इंडिया के डायरेक्टर थे तब ये ख़बरें अक्सर आती रहती थी कि शास्त्री कप्तान के तौर पर धोनी की जगह कोहली को पसंद करते हैं। कहा तो ये भी जाता है कि धोनी ने टेस्ट से संन्यास भी शास्त्री के दबाव और उनके कोहली प्रेम की वजह से ही लिया था। हालांकि ये बातें आजतक पर्दे के पीछे ही रही हैं और धोनी के स्वभाव और आदत को देखते हुए लगता है कि कभी बाहर आएंगी भी नहीं। बहरहाल, यही वजह है कि जानकारों को लग रहा है कि धोनी के लिए 2019 वर्ल्डकप तक टीम में रहना अब मुश्किल से भी ज़्यादा मुश्किल है।

रवि शास्त्री को कोच बनाने के लिए बीसीसीआई और सलाहकार समिति ने कुछ ऐसे काम किए हैं जिसपर सवाल खड़ा होना लाज़िमी है:

रवि शास्त्री कोच पद के लिए आवेदन दे सकें, इसके लिए आख़िरी तारीख़ को बढ़ाना कहां तक जायज़ था ?
सलाहकार समिति में होते हुए सचिन तेंदुलकर ने रवि शास्त्री को आवेदन देने के लिए मनाने की कोशिश क्यों की ?
कुंबले ने जब इस्तीफ़ा देने के बाद लिखी चिट्ठी में साफ़ लिखा था कि कोहली के साथ काम करना मुश्किल, तो फिर उन्हीं (कोहली) से राय लेना कहां तक जायज़ ?
क्या कोहली को बिग बॉस जैसा अधिकार देना और उनकी हर बात मानना भारतीय क्रिकेट टीम पर असर नहीं डालेगा ?
जब कुंबले के साथ तालमेल बैठा पाने में कोहली नाकाम रहे तो कैसे मान लिया जाए कि ज़हीर ख़ान और राहुल द्रविड़ के साथ उनका रवैया अच्छा रहेगा ?

रवि शास्त्री का कोच बनना धोनी युग के अंत के साथ साथ कोहली की विराट छवि की ओर भी इशारा कर रहा है। जिस तरह कोहली की ख़्वाहिशों के लिए बीसीसीआई और सलाहकार समिति ने मापदंडो और नियमों को ताक पर रखा है वह दर्शाता है कि इस समय कोहली कप्तान नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट टीम के बिग बॉस हो गए हैं।

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