पोर्ट एलिज़ाबेथ में कोहली एंड कंपनी एक साथ दो इतिहास रचने के लिए तैयार

दक्षिण अफ़्रीका दौरे पर गई टीम इंडिया के लिए अब तक सबकुछ मिला जुला रहा है। पहले दो टेस्ट में कोहली एंड कंपनी को जहां हार का सामना करना पड़ा था, तो जोहांसबर्ग में खेले गए तीसरे टेस्ट में मेहमानों ने जीत दर्ज करते हुए व्हाइटवॉश बचा लिया था। जोहांसबर्ग में मिली इस जीत ने मेहमानों के हौसले बुलंद कर दिए थे, जिसके बाद वनडे सीरीज़ में जीत की हैट्रिक लगाते हुए भारत ने मेज़बानों से करारा बदला लिया। हालांकि उसी जोहांसबर्ग में चौथे वनडे में प्रोटियाज़ ने पलटवार किया और सीरीज़ में पहली जीत दर्ज की। अब कारवां आ पहुंचा है पोर्ट एलिज़ाबेथ जहां आज खेला जाएगा पांचवां वनडे, टीम इंडिया की नज़र इसे जीतकर सीरीज़ पर कब्ज़ा करने की है तो मेज़बान टीम के पास सीरीज़ बचाने के लिए दोनों मैचों के जीतने के सिवाए और कोई विकल्प नहीं है।

पोर्ट एलिज़ाबेथ में मेहमानों का हुआ ढोल और नगाड़ों के साथ स्वागत

भारतीय क्रिकेट टीम जब पोर्ट एलिज़ाबेथ पहुंची तो उन्होंने भी नहीं सोचा था कि उनका स्वागत शाही अंदाज़ में होगा। इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि किस तरह टीम इंडिया का पारंपरिक अंदाज़ में होटल में स्वागत हो रहा है।

 

इतिहास रचने के लिए आंकड़ों को भी करना होगा दुरूस्त

टीम इंडिया का स्वागत तो ढोल नगाड़ों के साथ हुआ, लेकिन पोर्ट एलिज़ाबेथ का ये मैदान भारत के लिए कभी ख़ुशियां लेकर नहीं आया है। इस मैदान पर टीम इंडिया ने अब तक 5 वनडे मुक़ाबले खेले हैं जिसमें से एक में भी जीत नसीब नहीं हुई है। इस मैदान पर मेज़बानों ने भारत को पिछली 4 भिड़ंत में शिकस्त दी है, इतना ही नहीं 2001 में तो टीम इंडिया को केन्या के हाथों भी इस मैदान पर हार मिली थी। यानी अगर दक्षिण अफ़्रीकी सरज़मीं पर वनडे सीरीज़ जीतकर इतिहास रचना है तो फिर इसके लिए आख़िरी वनडे से बेहतर यही मौक़ा होगा क्योंकि अगर पोर्ट एलिज़ाबेथ में जीते तो फिर एक नहीं बनेंगे दो-दो इतिहास।

अब तक सीरीज़ में फ़्लॉप चल रहे रोहित शर्मा को ‘विराट’ चेतावनी

भारत के लिए इस सीरीज़ में अब तक सबकुछ अच्छा जा रहा है, बल्लेबाज़ी में जहां विराट कोहली और शिखर धवन लाजवाब फ़ॉर्म में हैं। तो गेंदबाज़ी में कुलदीप यादव और युज़वेंद्र चहल की स्पिन जोड़ी भी जोहांसबर्ग से पहले क़हर बरपाती आई है। विराट कोहली ने अब तक इस सीरीज़ में 396 रन बनाए हैं तो शिखर धवन ने भी 271 रन अपने नाम किए हैं। कुलदीप (12 विकेट) और चहल (12 विकेट) ने मिलकर 24 विकेट अपनी झोली में बटोरी है।

लेकिन भारत के लिए चिंता का सबब हैं मिस्टर 200 स्पेशलिस्ट रोहित शर्मा का फ़ॉर्म, इस सीरीज़ में खेले गए 4 मैचों में रोहित का स्कोर रहा है 5,0,15 और 20। इतना ही नहीं अफ़्रीकी सरज़मीं पर वनडे मैचों की बात करें तो रोहित ने अब तक कुल 12 मैचों की 11 पारियों में महज़ 11.45 की औसत से सिर्फ़ 126 रन बनाए हैं। रोहित की प्रतिभा पर शायद ही किसी को शक है लेकिन प्रोटियाज़ सरज़मीं पर उनका ये प्रदर्शन किसी बुरे सपने से कम नहीं, इस मैच में रोहित के पास एक और मौक़ा ज़रूर होगा ताकि वह अपने पिछले सभी हिसाब बराबर करें।

पिच का पेंच और मौसम का मिज़ाज

भारत के लिए एक अच्छी बात ये है कि जोहांसबर्ग की पिच पर जहां चहल और कुलदीप बेअसर दिखे थे, इस मैदान पर एक बार फिर प्रोटियाज़ को इन दोनों कलाइयों के जादूगर का सामना करना मुश्किल हो सकता है। इसकी वजह है पोर्ट एलिज़ाबेथ की पारंपरिक धीमी पिच, हाल के दिनों में हुए घरेलू मैचों में भी इस पिच पर स्पिनर्स का कमाल जारी रहा है। हालांकि मौसम एक बार फिर बड़ी भूमिका निभा सकता है, क्योंकि दिन रात्रि वाले इस मैच की सुबह हल्की बारिश हुई है और दोपहर में भी बारिश की संभावना है। ऐसे में कुछ हद तक इस पिच पर तेज़ गेंदबाज़ों को मदद मिल सकती है क्योंकि ज़ाहिर तौर पर पिच में नमी मौजूद होगी। इस बात की पूरी संभावना है कि यहां टॉस जीतने वाले कप्तान पहले गेंदबाज़ी करना मुनासिब समझेंगे, ताकि नमी का फ़ायदा भी उठाया जा सके और अगर मैच के बीच में बारिश आई तो रनों का पीछा करने वाली टीम को इसका फ़ायदा मिल सके जैसा जोहांसबर्ग में दक्षिण अफ़्रीकी टीम  को मिला था। एक और अहम बात ये है कि इस मैदान पर आख़िरी बार कोई दिन रात्रि का मुक़ाबला 2011 में खेला गया था।

टीम कॉम्बिनेशन को लेकर माथापच्ची दोनों ही टीमों की जारी

अब बात प्लेइंग-XI की, पिच के मिज़ाज को देखते हुए ये तो तय है कि मेज़बान टीम इस मैच में इमरान ताहिर और तबरेज़ शम्सी में से किसी एक स्पिनर को टीम में शामिल करेगी। जिसका मतलब ये हुआ कि लुंगी एनगीडी को बाहर बैठना पड़ सकता है, दूसरी तरफ़ डेविड मिलर और हेनरिक क्लासेन की लाजवाब पारियों ने फ़रहान बेहरदीन की वापसी पर क़रीब क़रीब प्रश्न चिह्न लगा दिया है।

तो वहीं टीम इंडिया की नज़र भी इस पिच को देखते हुए एक अतिरिक्त स्पिनर को उतारने पर होगी। केदार जाधव की मांसपेशियों में खिचांव अब तक सही नहीं हुआ है लिहाज़ा अगर वह फ़िट नहीं होते हैं तो श्रेयस अय्यर कुछ लेग स्पिन डाल सकते हैं, यही वजह है कि नेट्स में अय्यर ने काफ़ी गेंदबाज़ी की है। संभावना इसकी भी है कि अक्षर पटेल को टीम इंडिया नंबर-7 पर उतार सकती है जिसका फ़ायदा उनसे गेंदबाज़ी में उठाया जा सकता है। साथ ही साथ अगर एमएस धोनी भी गेंदबाज़ी करते हुए आपको पोर्ट एलिज़ाबेथ मैच में दिखे तो हैरान मत होइएगा क्योंकि धोनी ने भी नेट्स में ख़ूब गेंदबाज़ी की है और वह भी लेग स्पिन। जी हां, देखिए किस तरह धोनी डाल रहे हैं अक्षर पटेल के साथ लेग स्पिन।

 

भारत संभावित-XI: रोहित शर्मा, शिखर धवन, विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे, एम एस धोनी, केदार जाधव/श्रेयस अय्यर/अक्षर पटेल, हार्दिक पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, कुलदीप यादव, युज़वेंद्र चहल और जसप्रीत बुमराह

दक्षिण अफ़्रीका संभावित-XI: हाशिम अमला, एडेन मार्करम, जेपी डुमिनी, एबी डीविलियर्स, डेविड मिलर, हेनरिक क्लासेन, क्रिस मॉरिस, एडिंले फ़ेलुकवायो, कागिसो रबाडा, मोर्ने मोर्केल और इमरान ताहिर/तबरेज़ शम्सी

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सचिन के साथ कोहली की तुलना करना ‘विराट’ नाइंसाफ़ी, कोहली बना जा सकता है पर तेंदुलकर बनना असंभव

मौजूदा दौर में टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली का बल्ला शबाब पर है, जिस तरह कभी सचिन तेंदुलकर हरेक मैच में कोई न कोई रिकॉर्ड अपने नाम कर लेते थे। ठीक वैसे ही विराट कोहली भी रिकॉर्ड के बादशाह बनते जा रहे है, आने वाले वक़्त में अगर सचिन के 49 वनडे शतक और 100 अंतर्राष्ट्रीय शतकों को कोई तोड़ता दिख रहा है तो वह विराट कोहली ही हैं। एकदिवसीय मैचों में तो वह 34 शतकों के साथ सचिन तेंदुलकर के बाद दूसरे नंबर पर ही पहुंच गए हैं, इतना ही नही कोहली ने सचिन से 101 पारियां कम खेलते हुए इस मुक़ाम को छुआ है। वनडे में सबसे तेज़ 10 हज़ार रन बनाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी कोहली अपने नाम करने के बेहद क़रीब हैं, बतौर कप्तान भी वह लगातार भारत को जीत पर जीत दिला रहे हैं।

ज़ाहिर तौर पर विराट कोहली भारत की आन बान और शान बन चुके हैं, उनकी उपलब्धियों को देखते हुए हरेक हिन्दुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। जैसे कभी सचिन तेंदुलकर से भारत की पहचान होती थी, कोहली भी उन्हीं की तरह क्रिकेट में भारत के तिरंगे का मान बढ़ाते चले जा रहे हैं। यही वजह है कि कोहली को हर तरफ़ से तारीफ़ों से नवाज़ा जा रहा है, आईसीसी ने भी उन्हें क्रिकेटर ऑफ़ द ईयर से एक बार फिर सम्मानित किया। वनडे रैंकिंग में तो कोहली दूसरों से कहीं आगे निकलते जा रहे हैं। भारत में जिस तेज़ी से पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं, वनडे क्रिकेट में कोहली की औसत उससे भी ज़्यादा रफ़्तार से भागती हुई अब 60 के आंकड़े को छूने के क़रीब पहुंचती जा रही है।

3rd Momentum ODI: South Africa v India

 

कोहली की इन उपलब्धियों के बाद आज कल जो एक सबसे बड़ी चर्चा चल रही है वह ये कि उनका क़द महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर के समकक्ष पहुंच गया है। कोई उन्हें सचिन के साथ खड़ा कर रहा है तो कोई ब्रायन लारा, विवियन रिचर्ड्स और रिकी पॉन्टिंग से भी आगे बता रहा है। इसमें कोई शक नहीं है कि मौजूदा दौर के कोहली महान बल्लेबाज़ हैं, और अब तक के क्रिकेट इतिहास में भी उन्होंने अपना नाम दिग्गजों की फ़ेहरिस्त में शुमार कर लिया है। लेकिन उन्हें सचिन तेंदुलकर के समकक्ष खड़ा कर देना और उनकी तुलना सचिन के साथ कर देना मेरी नज़र में बिल्कुल ग़लत है। कभी भी दो अलग अलग युगों के क्रिकेटर के बीच तुलना नहीं की जा सकती, क्योंकि परिस्थितियों से लेकर दबाव और प्रदर्शन ये सभी चीज़ें एक जैसी नहीं हो सकती।

डॉन ब्रैडमैन से लेकर विवियन रिचर्ड्स, सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली तक आते आते खेल पूरी तरह बदल चुका है। ब्रैडमैन से लेकर विवियन रिचर्ड्स तक के दौर को गेंदबाज़ों का युग माना जाता था, यही वजह है कि ब्रैडमैन और रिचर्ड्स को एक अलग मुक़ाम पर रखा जाता है। सचिन ने जिस युग में क्रिकेट खेला तब इसमें बदलाव का दौर शुरू हो चुका था और ये खेल धीरे धीरे बल्लेबाज़ों की तरफ़ झुकता जा रहा था। बावजूद इसके तेंदुलकर के दौर में भी वसीम अकरम, वक़ार युनिस, एलन डोनाल्ड, ग्लेन मैक्ग्रॉ, ब्रेट ली, कर्टली एंब्रोज़, कोर्टनी वॉल्श, शोएब अख़्तर जैसे ख़ूंख़ार तेज़ गेंदबाज़ मौजूद थे तो क्रिकेट इतिहास में अब तक के दो सबसे सफल स्पिनरों की जोड़ी शेन वॉर्न और मुथैया मुरलीधरण का सामना भी सचिन ने जिस तरह किया वह इतिहास के सुनहरे अक्षरों में दर्ज है।

India v South Africa: Group B - 2011 ICC World Cup

 

इसके अलावा एक और चीज़ जो सचिन को कोहली से कहीं आगे खड़ा करती है वहां तक कोहली क्या किसी का भी पहुंचना मुमकिन ही नहीं नमुमकिन जैसा है। वह है 24 सालों तक लगातार हरेक मुक़ाबले में पूरे देश का दबाव अपने कंधों पर लेकर मैदान में सचिन का उतरना। तेंदुलकर ने क़रीब ढाई दशकों तक टीम इंडिया के लिए खेला और इस दौर में उनके करियर के आख़िर के कुछ सालों को छोड़कर कभी ऐसा मौक़ा नहीं आया था जब वह बिना दबाव में बल्लेबाज़ी करने जाएं। एक वह भी दौर था जब सचिन के आउट होते ही लोग टेलीवीज़न बंद कर दिया करते थे, स्टेडियम ख़ाली हो जाया करता था, हिन्दुस्तान की जीत की उम्मीद ख़त्म हो जाया करती थी क्योंकि सभी को उपर वाले के बाद इस 5 फ़ुट 5 इंच के बल्लेबाज़ पर ही भरोसा होता था, तभी मास्टर ब्लास्टर को ‘क्रिकेट का भगवान’ कहा जाने लगा था।

विराट कोहली जिस दौर में आए तब सबकुछ बदल चुका था, भारत क्रिकेट का सुपरपॉवर बन चुका था। टीम के पास महेंद्र सिंह धोनी जैसा विश्वविजेता कप्तान था, एक से बढ़कर एक शानदार मैच विनर टीम में थे। क्रिकेट का खेल बदल चुका था, अब ये जेंटलमेन गेम पूरी तरह से बल्लेबाज़ों का हो चुका था। आईसीसी के ज़्यादातर नियम भी बल्लेबाज़ों के पक्ष में हो चुके थे। जो तेंदुलकर कई ग़लत फ़ैसलों का शिकार होने की वजह से भारत की जीत के सूत्रधार बनते बनते रह जाते थे, आज कोहली शून्य पर आउट होने के बाद DRS के ज़रिए 160 नाबाद रन भी बना देते हैं। ये क्रांतिकारी बदलाव भी कोहली के दौर में ही पूरी तरह से लागू हुआ, हां ये भी सच है कि 2011 वर्ल्डकप के सेमीफ़ाइनल में भी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मास्टर ब्लास्टर को भी इसी DRS ने मदद पहुंचाई थी और नतीजा भारत की जीत लेकर आया था। लेकिन जैसा मैंने पहला कहा कि वह दौर सचिन के करियर का आख़िरी दौर था।

India v Sri Lanka - 2011 ICC World Cup Final

 

अब नियमों से लेकर पिच, बाउंड्री लाइन से लेकर बल्लों का आकार और गेंदों से लेकर आईसीसी की नज़र सबकुछ मानो बल्लेबाज़ों के लिए हो चुका है। ऐसे में अगर विराट कोहली या दूसरा कोई भी बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर, विवियन रिचर्ड्स, रिकी पॉन्टिंग के रिकॉर्ड्स से कहीं आगे भी चला जाता है तो उन जैसा क़द नहीं पा सकता। दूसरी चीज़ विराट कोहली सीमित ओवर और टेस्ट में दो अलग अलग कप्तान और खिलाड़ी दिखते हैं, इसकी एक बड़ी वजह है दबाव का फ़र्क़। टेस्ट में बतौर कप्तान वह बहुत ज़्यादा परेशान और झुंझलाहट में नज़र आते हैं, लेकिन सीमित ओवर में वह काफ़ी संतुलित और संयमित दिखते हैं। इसकी वजह हैं महेंद्र सिंह धोनी, एक ऐसा विकेटकीपर और पूर्व कप्तान जो आज भी एक कप्तान और अभिभावक की तरह हर मुश्किल घड़ी में सीमित ओवर क्रिकेट में विकेट के पीछे से गेंदबाज़ों को टिप्स देता रहता है और कोहली को हर वक़्त खेल के हिसाब से सलाह देता हुआ नज़र आता है। जो सचिन तेंदुलकर के दौर में देखने को नहीं मिलता था, और टीम बिखर जाती थी लेकिन फिर भी सचिन इसलिए महान थे क्योंकि वह अपनी बल्लेबाज़ी में एकाग्रता और संयम हर परिस्थिति में एक जैसा बनाए रखते थे।

आख़िर में मैं बस यही कहना चाहूंगा कि जिस तरह सर डॉन ब्रैडमैन और सचिन तेंदुलकर की तुलना नहीं की जा सकती। जिस तरह आकाश और पाताल के फ़र्क़ को कभी पाटा नहीं जा सकता, ठीक उसी तरह क्रिकेट के भगवान का दर्जा हासिल रखने वाले सचिन तेंदुलकर को किसी रिकॉर्ड के भरोसे विराट कोहली से कम या उनके समकक्ष भी रखना नाइंसाफ़ी नहीं ग़लत होगा। सचिन तेंदुलकर सिर्फ़ एक क्रिकेटर या खिलाड़ी नहीं वह एक सोच और विश्वास का नाम हैं, जो मैदान के अंदर और मैदान के बाहर भी वैसा ही महान है। सचिन में जो संयम और शांति पिच पर बल्ले के साथ दिखती थी वही मैदान के बाहर प्रेस कॉन्फ़्रेंस और नीजि ज़िंदगी में भी दिखी, जिस वजह से सिर्फ़ युवा क्रिकेटर ही नहीं बल्कि आम इंसान भी उन्हें अपना आदर्श मानता था और है। लेकिन क्रिकेटर तो कोहली को अपना आदर्श मानते हैं और मानना चाहिए भी पर एक आम इंसान अपने बच्चों को कोहली की तरह बल्लेबाज़ी करते तो देखना चाहता है पर वैसी आक्रामकता और झुंझलाहट से दूर रहने की हिदायत भी देता है, और यही फ़र्क़ है जो सचिन को ‘भगवान’ और कोहली को ‘बेहतरीन क्रिकेटर’ की श्रेणी में रखता है।

जोहांसबर्ग में टीम इंडिया की नज़र ‘विराट’ इतिहास बनाने पर, गुलाबी गैंग वाले मेज़बानों को मिला ‘बॉस’ का सहारा

भारत और दक्षिण अफ़्रीका के बीच 6 मैचों की वनडे सीरीज़ में विराट कोहली की सेना ने अब तक कमाल का प्रदर्शन करते हुए मेज़बानों को हर विभाग में चारों ख़ाने चित कर दिया है। 3 में से 3 मुक़ाबले जीतते हुए भारत 3-0 से आगे है और अब अगले 3 मैचों में से किसी एक में भी जीत टीम इंडिया को दक्षिण अफ़्रीकी सरज़मीं पर पहली बार किसी भी द्विपक्षीय सीरीज़ में जीत दिला देगी। भारत की नज़र आज होने वाले चौथे वनडे को ही जीतकर इतिहास रचने पर होगी ताकि अगले दो मैचों में कुछ प्रयोग किए जा सकें और बेंच पर बैठे खिलाड़ियों को भी मौक़ा दिया जा सके।

जोहांसबर्ग में गुलाबी गैंग का आंकड़ा है बेहद शानदार

हालांकि कोहली एंड कंपनी के लिए चौथा वनडे पिछले तीनों मुक़ाबलों से कई मायनो में अलग होगा। यहां जीत शायद ही उतनी आसानी से मिल पाए जितनी अब तक इस सीरीज़ में मिली है। इसकी पहली और सबसे बड़ी वजह है टीम में दिग्गज बल्लेबाज़ एबी डीविलियर्स की वापसी, जो अब तक इस सीरीज़ में उंगली में चोट की वजह से बाहर बैठे थे। इतना ही नहीं ये पिंक वनडे होगा, यानी दक्षिण अफ़्रीका इस मैच में गुलाबी कपड़ों में खेलने उतरेगी।

स्तन कैंसर के प्रति जागरुकता के लिए दक्षिण अफ़्रीका जोहांसबर्ग में पिछले कुछ सालों से एक वनडे मैच पिंक जर्सी में खेलता है, और गुलाबी जर्सी में इस टीम का प्रदर्शन कुछ अलग ही स्तर पर पहुंच जाता है। प्रोटियाज़ ने पिंक जर्सी में अब तक खेले गए 5 मैचों में 5 जीत दर्ज की है, जिसमें 2013 में भारत के ख़िलाफ़ 141 रनों की जीत भी शामिल है। इतना ही नहीं एबी डीविलियर्स गुलाबी जर्सी में बेहद ख़तरनाक बल्लेबाज़ी करते आए हैं, डीविलियर्स ने अब तक खेले 5 पिंक वनडे में 112.5 की बेमिसाल औसत से 450 रन बनाए हैं। गुलाबी कपड़ों में ही एबी डीविलियर्स ने 31 गेंदों पर वनडे इतिहास का सबसे तेज़ शतक जड़ा था जो आज भी उन्हीं के नाम है। ऐसे में टीम इंडिया के सामने मैदान के साथ साथ इन आंकड़ों से भी एक लड़ाई रहेगी।

कलाईयों के जादूगर हैं टीम इंडिया के जीत का मंत्र, लेकिन रोहित का बल्ला है ख़ामोश

वैसे तो कोहली के लिए अब तक सब कुछ शानदार जा रहा है, विराट ने 3 मैचों में अब तक 318 की औसत से 318 रन बनाए हैं, जिसमें दो शतक शामिल हैं। कुलदीप यादव (10 विकेट) और युज़वेंद्र चहल (11 विकेट) की जोड़ी ने अब तक इस सीरीज़ में 21 विकेट हासिल किए हैं, जबकि प्रोटियाज़ के 28 विकेट गिरे हैं। ये आंकड़े बताने के लिए काफ़ी हैं कि अब तक भारत की जीत के मंत्र कलाईयों के दोनों जादूगर और कप्तान विराट का बल्ला रहा है। कोहली के साथ साथ शिखर धवन भी लाजवाब फ़ॉर्म में हैं और अब तक उनके बल्ले से भी दो अर्धशतक आ चुके हैं, जोहांसबर्ग में खेला जाने वाला वनडे शिखर के करियर का 100वां एकदिवसीय मैच होगा ऐसे में वह चाहेंगे कि इसे यादगार बनाया जाए। इन सबके बीच टीम इंडिया के लिए चिंता का सबब रोहित शर्मा का ख़राब फ़ॉर्म है, अब तक तीनों ही वनडे में रोहित शर्मा कुछ ख़ास नहीं कर पाए हैं। दक्षिण अफ़्रीकी सरज़मीं पर उनका करियर औसत भी 12.10 है, जिसका मानसिक असर उनकी बल्लेबाज़ी पर दिख रहा है। उम्मीद है कि इन आंकड़ों को वांडेरर्स के मैदान में रोहित झूठा साबित करने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा देंगे।

पिच का पेंच और मौसम का मिज़ाज

टेस्ट सीरीज़ के दौरान जोहांसबर्ग की पिच काफ़ी सुर्ख़ियों में रही थी, तीसरे टेस्ट में अंपायर ने तो ख़राब पिच की वजह से खेल भी रोक दिया था था। हालांकि मुक़ाबला दोबारा शुरू हुआ और भारत ने टेस्ट भी जीता। आईसीसी ने इस पिच को लेकर फटकार भी लगाई थी और डिमेरिट अंक भी दिए थे, ऐसे में उम्मीद है कि वनडे की पिच बिल्कुल अलग नज़र आएगी। वैसे भी जोहांसबर्ग में वनडे मुक़ाबलों में पिच बल्लेबाज़ों के मूफ़ीद मानी जाती है, इसी मैदान पर वनडे इतिहास के सबसे बड़े चेज़ का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी है जब ऑस्ट्रेलिया के 434 रनों के जवाब में मेज़बानों ने 438 रन बनाते हुए मुक़ाबला जीत लिया था।

आज भी पिच सपाट और बल्लेबाज़ों के अनुकूल हो सकती है, लेकिन मौसम क्रिकेट में व्यवधान ज़रूर डाल सकता है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो शनिवार को जोहांसबर्ग में बीच बीच में बारिश की संभावना भी है, अगर ऐसा हुआ और बादल छाए रहे तो स्वाभाविक है कि मदद तेज़ गेंदबाज़ों को मिल सकती है। इस मैदान पर ज़्यादातर कप्तान पहले गेंदबाज़ी करना पसंद करते हैं।

एबी डीविलियर्स की वापसी किसको करेगी बाहर ?

दक्षिण अफ़्रीका और उनके फ़ैस के लिए इससे अच्छी ख़बर और कोई नहीं हो सकती कि एबी डीविलियर्स चौथे वनडे के लिए फ़िट हो गए हैं। सभी को उम्मीद होगी कि एबीडी की वापसी प्रोटियाज़ टीम की काया पलटने का काम करेगी। डीविलियर्स के लिए खाया ज़ोंडो को बाहर बैठना पड़ सकता है, साथ ही साथ मोर्ने मोर्केल भी इस मैच में खेलते हुए नज़र आएंगे, जिसका मतलब हुआ कि लुंगी एनगीडी बाहर बैठ सकते हैं।

दूसरी तरफ़ टीम इंडिया एक बार फिर बिना किसी बदलाव के ही इस मैच में उतरती हुई दिखाई दे रही है। जोहांसबर्ग जीतकर ही कोहली बेंच पर बैठे खिलाड़ियों को परखने की कोशिश करेंगे, फ़िलहाल वह विनिंग कॉम्बिनेशन में छेड़छाड़ करें, इसकी गुंजाइश कम ही मालूम पड़ती है।

भारत संभावित-XI: शिखर धवन, रोहित शर्मा, विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे, एम एस धोनी, केदार जाधव, हार्दिक पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, कुलदीप यादव, युज़वेंद्र चहल और जसप्रीत बुमराह

दक्षिण अफ़्रीका संभावित-XI: हाशिम अमला, एडेन मार्करम, जेपी डुमिनी, एबी डीविलियर्स, डेविड मिलर, हेनरिक क्लासेन, क्रिस मॉरिस, एंडीले फ़ेलुकवायो, कगिसो रबाडा, मोर्न मोर्केल और इमरान ताहिर

 

 

डरबन और सेंचुरियन के बाद अब कोहली एंड कंपनी की नज़र केपटाउन जीतने के साथ 3-0 पर

दक्षिण अफ़्रीका दौरे पर गई टीम इंडिया ने जिस तरह से लगातार दो मैचों में हार के साथ आग़ाज़ किया था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि भारत इस तरह पलटवार करेगा। जोहांसबर्ग में खेले गए तीसरे टेस्ट में मिली शानदार जीत ने भारतीय क्रिकेट टीम में आत्मविश्वास भर दिया। जिसका नतीजा है कि 6 मैचों की वनडे सीरीज़ के पहले दो मुक़ाबलों में विराट कोहली की इस टीम ने खेल के हर विभाग में मेज़बान को चारों खाने चित कर दिया।

कोहली का कारवां पहुंचा केपटाउन जहां से हुआ था दौरे का आग़ाज़

डरबन और सेंचुरियन में जीत के बाद टीम इंडिया केपटाउन के उसी मैदान पर आज तीसरा वनडे खेलेगी, जहां से भारत ने दौरे की शुरुआत की थी। केपटाउन में खेले गए पहले टेस्ट में मेज़बान टीम को जीत हासिल हुई थी, लेकिन अब कहानी बदल चुकी है। सेंचुरियन और डरबन में लगातार दो जीतों से 6 मैचों की वनडे सीरीज़ में भारत को 2-0 की बढ़त हासिल है और केपटाउन की जीत का मतलब होगा सीरीज़ में अजेय हो जाना। लिहाज़ा केपटाउन में दबाव मेहमानों पर नहीं बल्कि मेज़बानों पर होगा।

मेज़बानों के लिए बेहद भाग्यशाली रहा है केपटाउन

सीरीज़ में अब तक भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है और उम्मीद रहेगी कि केपटाउन में भी टीम इंडिया इसी लय को बरक़रार रखे। मेज़बानों की चोट और स्पिनर्स के ख़िलाफ़ उनकी परेशानी मैच से पहले ही भारत को मज़बूत बता रही है, लेकिन एक चीज़ ऐसी भी है जिससे भारत को होशियार रहना होगा। और वह है प्रोटियाज़ का इस मैदान पर शानदार आंकड़ा, दक्षिण अफ़्रीका को केपटाउन में खेले गए 33 वनडे मैचों में 28 जीत हासिल हुई है। जो ये बताता है कि इस मैदान पर भाग्य हमेशा मेज़बानों के साथ रहता है, हालांकि जिन 5 मुक़ाबलों में उन्हें हार मिली है उसमें एक भारत के ख़िलाफ़ भी आई है। टीम इंडिया ने इस मैदान पर आख़िरी बार 2011 में जीत दर्ज की थी, जब 2 विकेट से मेज़बानों को हराया था।

पिच का पेंच और मौसम का मिज़ाज

केपटाउन के न्यूलैंड्स की पिच टेस्ट में जो दिख रही थी, वनडे में उससे अलग है। टेस्ट में जहां इस पिच पर घास थी, तो वहीं वनडे के लिए घास हटा दी गई है और एक सपाट बल्लेबाज़ी पिच मानी जा रही है। केपटाउन का इतिहास भी बड़े स्कोर वाले मैचों का रहा है, इत्तेफ़ाक से इस मैदान पर पिछला वनडे भी आज के ही दिन यानी 7 फ़रवरी 2017 को खेला गया था। दक्षिण अफ़्रीका और श्रीलंका के बीच हुए उस मुक़ाबले में कुल 694 रन बने थे, फ़ाफ़ डू प्लेसी ने उसी मैच में अपने करियर की सबसे बड़ी 185 रनों की पारी खेली थी। मेज़बानों ने 367 रन बनाए थे जिसके जवाब में श्रीलंका भी 327 रनों तक पहुंच गया था। मतलब साफ़ है कि पिच एक बार फिर बल्लेबाज़ों के लिए जन्नत साबित हो सकती है, भारत के कलाईयों के दो जादूगरों से बचने के लिए प्रोटियाज़ भी चाहेगा कि पिच बल्लेबाज़ों के लिए ही मूफ़ीद हो।

बात मौसम की करें तो क्रिकेट के लिए एक और बेहतरीन मौसम की बात की जा रही है। जहां बारिश की संभावना न के बराबर है, और वैसे भी केपटाउन दुनिया के उन चुनिंदा मैदानों में से एक है जहां आज तक कोई भी वनडे मुक़ाबला बारिश की भेंट नहीं चढ़ा है। इस मैदान पर अब तक खेले गए सभी 39 वनडे मैचों में नतीजे आए हैं, और आज भी उम्मीद यही की जा रही है।

चोट से परेशान मेज़बानों की क्या होगी टीम कॉम्बिनेशन ?

दक्षिण अफ़्रीका के लिए ये सीरीज़ अगर किसी चीज़ के लिए सबसे ज़्यादा याद की जाएगी तो उनके स्टार खिलाड़ियों की चोट की समस्या के लिए। इसी मैदान से चोट की शुरुआत हुई थी, जब पहले टेस्ट के दौरान डेल स्टेन चोटिल हो गए थे। इसके बाद तीसरे टेस्ट में एबी डीविलियर्स को भी चोट लगी और वह वनडे सीरीज़ के पहले 3 मैचों से बाहर हो गए। ये सिलसिला डरबन में भी जारी रहा जब प्रोटियाज़ कप्तान फ़ाफ़ डू प्लेसी विराट कोहली का कैच पकड़ने के प्रयास में अपनी उंगली तोड़वा बैठे और सीमित ओवर सीरीज़ से बाहर हो गए। ये एक बड़ा झटका था, लेकिन ये फ़ेहरिस्त यहीं नहीं थमी, सेंचुरियन वनडे में विकेटकीपर बल्लेबाज़ क्विंटन डी कॉक भी चोटिल हो गए और अब वह भी सीमित ओवर सीरीज़ से बाहर हो गए हैं।

डी कॉक की जगह केपटाउन वनडे में हेनरिक क्लासेन डेब्यू करेंगे, हालांकि विकेटकीपर की भूमिका तो क्लासेन निभाएंगे लेकिन हाशिम अमला के साथ सलामी बल्लेबाज़ी करने कप्तान एडेन मार्करम आ सकते हैं। इसके अलावा एक और बदलाव जो मेज़बान कर सकती है वह ये है कि भारतीय स्पिनर्स के सामने एक अतिरिक्त बल्लेबाज़ के साथ जा सकती है, ऐसा हुआ तो तबरेज़ शम्सी की जगह फ़रहान बेहरदीन को प्लेइंग-XI में शामिल किया जा सकता है। दूसरी तरफ़ लगातार दो वनडे में कमाल का प्रदर्शन करने वाली भारतीय टीम केपटाउन में भी विनिंग कॉम्बिनेशन में कोई छेड़छाड़ करने के मूड में नहीं है।

भारत संभावित-XI: शिखर धवन, रोहित शर्मा, विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे, एम एस धोनी, केदार जाधव, हार्दिक पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, कुलदीप यादव, युज़वेंद्र चहल और जसप्रीत बुमराह

दक्षिण अफ़्रीका संभावित-XI: क्विंटन डी कॉक, हाशिम अमला, एडेन मार्करम, जेपी डुमिनी, डेविड मिलर, फ़रहान बेहरदीन, क्रिस मॉरिस, एंडिल फ़ेलुकवायो, कगिसो रबाडा, मोर्न मोर्केल और इमरान ताहिर

 

 

 

भारतीय महिला हॉकी टीम की धुरंधर खिलाड़ी पूनम रानी मलिक से Exclusive बातचीत

भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए साल 2018 काफ़ी महत्वपूर्ण होने वाला है, क्योंकि इस साल टीम इंडिया को तीन बड़े टूर्नामेंट में शिरकत करनी है। इस साल भारतीय महिला हॉकी टीम के फ़ैंस की नज़र कॉमनवेल्थ गेम्स, हॉकी वर्ल्ड कप और एशियन गेम्स पर टिकी हुई है। पिछला साल भारतीय महिला खिलाड़ियों के लिए फ़िट्नेस के लिहाज़ से अच्छा नहीं रहा था, कई खिलाड़ियों को चोट से जूझना पड़ा था। उनमें से एक हैं भारत की शानदार स्ट्राइकर और सबसे ज़्यादा गोल करने वाली महिला खिलाड़ियों में से एक पूनम रानी मलिक।

भारत के लिए 150 से ज़्यादा अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने वाली 25 वर्षीय पूनम मलिक क़रीब एक साल के बाद चोट से वापसी कर रही हैं। पूनम फ़िलहाल रांची में हैं जहां वह चोट से वापस आने के बाद सीनियर विमेंस राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हरियाणा की तरफ़ से खेल रही हैं। पूनम रांची में चल रही इस प्रतियोगिता में अपना 100 फ़ीसदी दे रही हैं और उनकी कोशिश है कि जल्द से जल्द वह एक बार फिर भारत के लिए भी पहले की ही तरह जलवा बिखेरें। हाल ही में बैंगलोर में हुए यो यो टेस्ट में भी पूनम सफल रही हैं, जिसमें उनका स्कोर 19 था। इस स्टार खिलाड़ी ने वरिष्ठ खेल संवाददाता सैयद हुसैन से कई मुद्दों पर खुल कर बात की और अपना अगला लक्ष्य जल्द से जल्द भारतीय टीम में लौटने को बताया। पूनम ने हाल ही में अंडर-19 वर्ल्डकप जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम को भी जीत की बधाई दी।

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सैयद हुसैन: पिछले साल कनाडा में वर्ल्ड हॉकी लीग में चैंपियन रही टीम के साथ आप शामिल थीं, लेकिन फिर लगातार चोट ने आपको क़रीब साल भर मैदान से दूर रखा, कैसे देखती हैं आप उस वक़्त को ?

पूनम रानी मलिक: वह ऐसा वक़्त था जिसमें आप कुछ नहीं कर सकते हैं, मेरे साथ तो दो दो इंजरी हुई। एक चोट से पूरी तरह उबरी भी नहीं थी कि दोबारा चोट लगी और वह ज़्यादा ख़तरनाक थी। मुझे सर्जरी से भी गुज़रना पड़ा था, डॉक्टर्स ने मुझसे कहा था कि 7 महीने आपको लग जाएंगे दोबारा मैदान में उतरने के लिए। उपर वाली कृपा है कि मैं 6 महीने बाद आज वापसी की राह पर हूं, मेरा अगला सपना अब टीम इंडिया के लिए दोबारा खेलना है।

सैयद हुसैन: हाल ही में बैंगलोर में क़रीब 33 खिलाड़ियों को ‘यो-यो’ टेस्ट से गुज़रना पड़ा था जिसमें आप भी थीं, कितनी बड़ी परीक्षा थी आपके लिए ?

पूनम रानी मलिक: जी बिल्कुल, मैं सर्जरी के बाद वापसी कर रही थी। मुझे डर भी लग रहा था लेकिन अपने उपर आत्मविश्वास भी था, जिसका ही परिणाम था कि मेरा स्कोर यो यो टेस्ट में 19 रहा। मेरे प्रदर्शन से सारे सपोर्ट स्टाफ़ भी ख़ुश थे, जिसे देखकर मुझे अच्छा लगा।

सैयद हुसैन: भारत को इस साल तीन बड़े टूर्नामेंट खेलने हैं जिसमें कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और वर्ल्डकप भी है, आप इसके लिए ख़ुद को और टीम को कितना तैयार मान रही हैं ?

पूनम रानी मलिक: मुझे ख़ुद पर पूरा भरोसा है और मैं इसके लिए अपना 100 फ़ीसदी दे रही हूं। मैं कहीं से भी किसी तरह मेहनत में कमी नहीं कर रही, बाक़ी तो क़िस्मत और मैदान पर होने वाले प्रदर्शन पर निर्भर करता है। कोच हरेन्द्र सिंह की देख रेख में पूरी टीम जमकर तैयारी कर रही है जिसका असर मैदान पर ज़रूर दिखेगा।

सैयद हुसैन: हरियाणा सरकार कई सालों से आपको नौकरी देनी की बात करती आई है, क्या वायदों से आगे बढ़ी है बात ?

पूनम रानी मलिक: अभी पिछले ही महीने खेल मंत्री अनिल विज से मुलाक़ात हुई थी, जहां उन्होंने हमेशा की तरह फिर आश्वासन दिया है। इससे ज़्यादा मैं क्या कहूं, बस यही कहूंगी कि उम्मीद पर दुनिया क़ायम है।

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सैयद हुसैन: अभी अभी अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्डकप में भारतीय क्रिकेट टीम चैंपियन बनी, कुछ कहना चाहेंगी आप ?

पूनम रानी मलिक: जी बिल्कुल, ये शानदार और इस उपलब्धि के लिए मैं कोच राहुल द्रविड़ और कप्तान पृथ्वी शॉ के साथ साथ सभी खिलाड़ियों को बधाई देना चाहूंगी जिन्होंने हमारे देश का नाम रोशन किया। साथ ही साथ मुझे ये देखकर भी अच्छा लगा कि जब न्यूज़ीलैंड में ही भारतीय पुरुष हॉकी टीम मौजूद थी तो राहुल द्रविड़ और पूरी टीम उनका मैच देखने पहुंची थी और हौसला अफ़ज़ाई करने गई थी जो वाक़ई शानदार था।

सैयद हुसैन: देश में महिलाओं के साथ आए दिन जिस तरह की हिंसक घटनाएं घटती रहती हैं, उसपर क्या कहना चाहेंगी ?

पूनम रानी मलिक: इसको लेकर मेरी सरकार से अपील है कि सिर्फ़ नारों से काम नहीं चलेगा, महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़े क़दम उठाने बेहद ज़रूरी हैं। मैं तो चाहूंगी कि बलात्कार के दोषियों को फांसी की सज़ा का प्रावधान होना चाहिए।

सैयद हुसैन: युवा बच्चों के लिए सरकार के इस ‘’खेलो इंडिया’’ को लेकर आपकी क्या राय है ?

पूनम रानी मलिक: ये बहुत अच्छा क़दम है सरकार का, जिससे वे बच्चे खेल के प्रति आगे आएंगे जिन्हें संसाधनों और पैसों की कमी की वजह से खेल में करियर बनाने में परेशानी होती थी। मेरी नज़र में ये सरकार की बेहतरीन पहल है।

सैयद हुसैन: एक आख़िरी सवाल, और वह ये कि अक्सर आपका आरोप रहता है कि हम पत्रकार हॉकी को कम और क्रिकेट को ज़्यादा बढ़ावा देते हैं, क्या अभी भी आप यही कहेंगी ?

पूनम रानी मलिक: हा हा हा… (हंसते हुए), नहीं नहीं, अब ये मेरी शिक़ायत नहीं है। अब आप और दूसरे पत्रकार भी सभी खेलों को बढ़ावा देते हैं। और साथ ही साथ धोनी और कोहली भी दूसरे खेलों की हौसला अफ़ज़ाई के लिए आगे आते हैं, जो सच में शानदार है, क्योंकि क्रिकेट हो या हॉकी या फिर कोई भी खेल नाम तो देश का ही होता है।

डरबन में जीत का डंका बजाने के बाद भारत सेंचुरियन में चोटिल मेज़बानों पर एक और वार करने के लिए है तैयार

पहले दो टेस्ट में हार फिर जोहांसबर्ग में पलटवार और डरबन में वनडे सीरीज़ की जीत से शुरुआत करने वाली टीम इंडिया अब सेंचुरियन वनडे के लिए भी तैयार है। लगातार दो मैचों में जीत के बाद विराट कोहली की सेना को जहां जीत का स्वाद भा गया है, तो मेज़बानों की क़ामयाबी का सूत्र बिगड़ गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है प्रोटियाज़ के दो दिग्गजों का एक साथ चोटिल हो जाना, पहले एबी डीविलियर्स और फिर कप्तान फ़ाफ़ डू प्लेसी। डीविलियर्स की चौथे वनडे से टीम के साथ जुड़ने की उम्मीद तो है लेकिन डरबन में शतक लगाने वाले कप्तान फ़ाफ़ वनडे और टी20 दोनों ही सीरीज़ से बाहर हो गए हैं।

ग्रीम स्मिथ के बाद सबसे युवा कप्तान पर है बड़ी ज़िम्मेदारी

डू प्लेसी के वनडे और टी20 से बाहर होने के बाद दक्षिण अफ़्रीकी क्रिकेट बोर्ड ने सभी को चौंकाते हुए केवल 2 वनडे का अनुभव रखने वाले एडेन मार्करम के कंधों पर इस सीरीज़ में बाक़ी बचे मैचों की कप्तानी का दायित्व दे दिया है। सेंचुरियन वनडे में जब मार्करम टॉस के लिए सिक्का उछालने जाएंगे तो वह 23 वर्ष और 123 दिन के रहेंगे, इस मामले में वह सिर्फ़ दूसरे सबसे युवा दक्षिण अफ़्रीकी कप्तान होंगे। प्रोटियाज़ की तरफ़ से सबसे कम उम्र में कप्तानी का रिकॉर्ड ग्रीम स्मिथ के नाम है जब उन्होंने पहली बार 22 साल और 59 दिन की उम्र में दक्षिण अफ़्रीका के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुक़ाबले में कप्तानी की थी। मार्करम के लिए अच्छी बात ये है कि इस टीम में हाशिम अमला, जेपी डुमिनी और डेविड मिलर जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं जिनसे उन्हें मदद मिलती रहेगी। मार्करम ने अंडर-19 स्तर पर दक्षिण अफ़्रीका की कप्तानी की है लिहाज़ा इस बड़ी ज़िम्मेदारी के लिए भी तैयार हैं।

टीम इंडिया के पास 2-0 की बढ़त लेने का है विराट मौक़ा

एबी डीविलियर्स और फ़ाफ डू प्लेसी की ग़ैरमौजूदगी में विराट कोहली की नज़र होगी जीत की इसी लय को बरक़रार रखते हुए सेंचुरियन में भी मेज़बानों पर दबाव बनाने की, ताकि बढ़त को 2-0 तक ले जाया जा सके। हालांकि हाशिम अमला, क्विंटन डी कॉक और डेविड मिलर के अनुभव के साथ साथ युवा कप्तान मार्करम की प्रतिभा भी किसी से छिपी नहीं है। लेकिन डरबन में भारतीय कलाइयों के दो जादूगरों के सामने जिस तरह फ़ाफ़ को छोड़कर कोई भी अफ़्रीकी बल्लेबाज़ सहजता से नहीं खेल पाया था, उसी दबाव को एक बार फिर युज़वेंद्र चहल और कुलदीप यादव की जोड़ी जारी रखना चाहेगी। ज़ाहिर है प्रोटियाज़ टीम के उपर दो दिग्गजों के न रहने का अहसास ज़रूर हावी रहेगा और उसी मानसिक स्थिति पर टीम इंडिया और चोट पहुंचाने की कोशिश करेगी।

सेंचुरियन के आंकड़े और डरबन का सफल प्रयोग भी है भारत के साथ

डरबन के आंकड़े भले ही भारत के ख़िलाफ़ थे लेकिन जीत दर्ज करते हुए कोहली एंड कंपनी ने वहां एक नया इतिहास लिखा था। ठीक उसके विपरित सेंचुरियन में भारत ने अब तक 5 बार प्रोटियाज़ के साथ वनडे मुक़ाबले खेले हैं, जिसमें से 2 में जीत का सेहरा टीम इंडिया के सिर बंधा है तो दो बार मेज़बानों ने बाज़ी मारी है। एक मुक़ाबला बारिश की भेंट चढ़ गया था, यानी दोनों ही टीमों का स्कोर 2-2 है। एक और चीज़ भारत की मुश्किलों को काफ़ी हद तक कम करती हुई दिख रही है, और वह है डरबन में नंबर-4 पर अजिंक्य रहाणे का प्रयोग, जिसमें रहाणे पूरी तरह सफल रहे और 79 रनों की शानदार पारी खेली थी। रहाणे और कोहली ने तीसरे विकेट के लिए रिकॉर्ड 189 रन भी जोड़े थे, इतना ही नहीं रहाणे ने वनडे में लगातार 5 पारियों में 5 बार 50+ का स्कोर बनाते हुए भारतीय रिकॉर्ड की भी बराबरी कर ली है। हां, दक्षिण अफ़्रीकी सरज़मीं पर रोहित शर्मा के आंकड़े उनके ख़िलाफ़ ज़रूर हैं, लेकिन रोहित की क़ाबिलियत पर किसी को शक नहीं है। क्या पता जैसे डरबन में टीम इंडिया ने इतिहास रचा था, उसी तरह अपने करियर में अफ़्रीकी ज़मीन पर क़रीब 13 की औसत से सिर्फ़ 106 रन बनाने वाले रोहित सेंचुरियन में इन आंकड़ों को बदल डालें।

पिच का पेंच और मौसम का मिज़ाज

इससे पहले कि पिच की बात करें, एक बार याद दिला दें कि ये मुक़ाबला दिन रात्रि का नहीं बल्कि पूरी तरह दिन का मुक़ाबला है। आधुनिक दौर में सीमित ओवर मुक़ाबले कम ही दिन में खेले जाते हैं, लेकिन वेस्टइंडीज़ और दक्षिण अफ़्रीका में हर सीरीज़ में एक आक मुक़ाबला दिन में देखने को मिल ही जाता है। सेंचुरियन की पिच आमूमन दिन रात्रि में जिस तरह बल्लेबाज़ों के लिए मूफ़ीद मानी जाती है, उसके उलट दिन के मुक़ाबले में कम से कम सुबह के समय ये गेंदबाज़ों को मदद देती है। इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस पिच पर दिन में हुए पिछले 5 एकदिवसीय मुक़ाबलों में 4 बार पहले गेंदबाज़ी करने वाली टीम ने जीते हैं। लिहाज़ा इस पिच पर टॉस एक बार फिर अहम साबित हो सकता है।

साथ ही साथ सेंचुरियन में कुछ दिनों पहले ही बारिश हुई थी जिसकी वजह से पिच में थोड़ी नमी की संभावना की जा रही है। मौसम विभाग के मुताबिक़ रविवार को भी बारिश की संभावना है, हालांकि उम्मीद है कि ये शाम के समय में होगी, जब मैच ख़त्म हो गया रहेगा।

क्या टीम इंडिया करेगी कोई बदलाव, कौन लेगा फ़ाफ़ डू प्लेसी की जगह ?

पिच भले ही सुबह के समय तेज़ गेंदबाज़ों को मदद करे, लेकिन इस बात की संभावना बेहद कम है कि विराट कोहली दाएं हाथ के लेग स्पिनर युज़वेंद्र चहल और बाएं हाथ के चाइनामैन गेंदबाज़ कुलदीप यादव में से किसी को बाहर रखें। चहल और कुलदीप ने मिलकर डरबन में 5 विकेट झटके थे और दोनों की गेंदों को समझ पाना अफ़्रीकी बल्लेबाज़ों के लिए पहेली से कम नहीं था। लिहाज़ा टीम में बदलाव करने के लिए मशहूर विराट कोहली सेंचुरियन में बिना किसी बदलाव के उतरें तो हैरानी नहीं होगी।

दूसरी तरफ़ मेज़बान टीम फ़ाफ़ की जगह फ़रहान बेहदरीन को प्लेइंग-XI में शामिल कर सकती है। हालांकि शुरुआत में फ़रहान स्कॉयड में भी नहीं थे, रिज़र्व बल्लेबाज़ के तौर पर खोया ज़ोंडो को शामिल किया गया था। लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है कि अफ़्रीका ज़ोंडो को डेब्यू कराएगा, क्योंकि अहम मुक़ाबले में फ़रहान का अनुभव उन्हें प्लेइंग-XI का टिकट दिला सकता है।

भारत संभावित-XI: शिखर धवन, रोहित शर्मा, विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे, एम एस धोनी, केदार जाधव, हार्दिक पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, कुलदीप यादव, युज़वेंद्र चहल और जसप्रीत बुमराह

दक्षिण अफ़्रीका संभावित-XI: क्विंटन डी कॉक, हाशिम अमला, एडेन मार्करम, जेपी डुमिनी, डेविड मिलर, फ़रहान बेहरदीन, क्रिस मॉरिस, एंडिल फ़ेलुकवायो, कगिसो रबाडा, मोर्न मोर्केल और इमरान ताहिर

 

चौथी बार दुनिया जीतने के इरादे से उतरेगी पृथ्वी की अगुवाई में टीम इंडिया

दक्षिण अफ़्रीकी सरज़मीं पर अगर कोहली एंड कंपनी ने पिछले दो मैचों से लय पकड़ी है, तो न्यूजीलैंड में पृथ्वी शॉ की कप्तानी में टीम इंडिया इतिहाच रचने के कगार पर खड़ी है। न्यूज़ीलैंड में खेले जा रहे अंडर-19 वर्ल्डकप में अब बस एक ही मुक़ाबला बचा और वह है ख़िताबी मुक़ाबला। जहां 3 बार का वर्ल्ड चैंपियन भारत चौथी बार ख़िताब पर कब्ज़ा करने के लिए बेक़रार है। भारत के सामने ऑस्ट्रेलियाई टीम है, जिसने भी 3 बार अब तक अंडर-19 वर्ल्डकप जीता है। यानी शनिवार को न्यूज़ीलैंड के माउंट मंगानुई में होने वाले फ़ाइनल को जो भी जीतेगा वह चौथी बार चैंपियन बनते हुए इतिहास रच डालेगा। भारत ने पहली बार साल 2000 में मोहम्मद कैफ़ की कप्तानी में जीता था अंडर-19 का वर्ल्डकप, जिस टीम में युवराज सिंह और रितेंदर सिंह सोढ़ी भी शामिल थे। इसके 8 साल बाद 2008 में मौजूदा भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने दूसरी बार भारत को बनाया था वर्ल्ड चैंपियन और फिर 2012 में दिल्ली के उनमुक्त चंद ने टीम इंडिया को तीसरी बार अंडर-19 वर्ल्डकप का बनाया था विजेता।

लीग मैच के आग़ाज़ का होगा एक्शन रिप्ले

टीम इंडिया ने अंडर-19 वर्ल्डकप 2018 का आग़ाज़ इसी मैदान पर और संयोग से ऑस्ट्रेलिया के ही ख़िलाफ़ किया था। जहां पहले बल्लेबाज़ी करते हुए भारत ने 328/7 रन बनाए थे और कंगारुओं को 228 रनों पर ढेर करते हुए 100 रनों से जीत दर्ज की थी। भारत ने इसके बाद पपुआ न्यू गिनी, ज़िम्बाब्वे, बांग्लादेश और पाकिस्तान को शिकस्त देते हुए अनबिटेन फ़ाइनल में जगह बनाई है। जबकि ऑस्ट्रेलिया ने भी उस हार के बाद कोई और शिकस्त नहीं झेली है। ऑस्ट्रेलिया जहां लीग मैच में भारत से मिली हार का बदला लेना चाहेगा तो टीम इंडिया की नज़र उसी मैच का एक्शन रिप्ले करते हुए इतिहास रचने पर होगी।

राहुल द्रविड़ की ये टीम हर मामले में है शानदार

पृथ्वी शॉ की कप्तानी और राहुल द्रविड़ की लाजवाब कोचिंग का ही नतीजा है कि ये टीम इंडिया हर विभाग में दूसरों से कहीं आगे है। इस टूर्नामेंट की सभी पारियों में शुबमन गिल ने जहां 50+ का स्कोर बनाया है तो पृथ्वी शॉ, मनजोत कालरा और रियान पराग जैसे बेहतरीन बल्लेबाज़ इस टीम में मौजूद हैं। साथ ही साथ अनुकूल शर्मा और अभिषेक शर्मा स्पिन और ऑलराउंडर की दोहरी भूमिका में प्रभावशाली प्रदर्शन करते आ रहे हैं। इस टीम की सबसे बड़ी ख़ासियत है तेज़ गेंदबाज़ी जहां कमलेश नागरकोटी और शिवम मावी जैसे दो ऐसे गेंदबाज़ मौजूद हैं जिनकी रफ़्तार के सामने पहले मैच में कंगारू बल्लेबाज़ों ने घुटने टेक दिए थे। नागरकोटी ने तो इस टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलिया के ही ख़िलाफ़ 149 किमी की रफ़्तार से गेंद डाली थी, तो सेमीफ़ाइनल में इशान पोरेल ने भी 4 पाकिस्तानी बल्लेबाज़ों को शिकार बनाया था।

चोट से जूझ रही ऑस्ट्रेलियाई टीम के पास है बस पोपका सहारा

भारत के लिए जहां अब तक सबकुछ बेहतरीन है तो कंगारू टीम की सबसे बड़ी समस्या है उनके चोटिल खिलाड़ी। टूर्नामेंट में अब तक लाजवाब गेंदबाज़ी करने वाले तेज़ गेंदबाज़ जेसन रॉल्सटन चोट की वजह से बाहर हो गए हैं। रॉल्सटन के नाम इस वर्ल्डकप का दूसरा सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है जो पारी में 15 रन देकर 7 विकेट है। रॉल्सटन की जगह आरोन हार्डी को शामिल किया गया था और अब वह भी चोटिल हो गए हैं। ख़िताबी मुक़ाबले में अब नई गेंद की ज़िम्मेदारी ज़ैक इवंस और रेयान हेडली के कंधों पर होगी। हालांकि इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अंडर-19 वर्ल्ड कप का रिकॉर्ड बनाने वाले लेग स्पिनर लॉयड पोप से कंगारुओं को बहुत उम्मीदें होंगी। पोप ने क्वार्टर फ़ाइनल में 8 विकेट झटकते हुए नया रिकॉर्ड बना डाला था। भारत के ख़िलाफ़ लीग मैच में 73 रनों की पारी खेलने वाले सलामी बल्लेबाज़ और ऑलराउंडर जैक एडवर्ड्स पर बल्लेबाज़ी का दारोमदार होगा।

पिच का पेंच और मौसम का मिज़ाज

माउंट मंगानुई में पिछले कुछ दिनों से बारिश और आंधी का सिलसिला जारी था, हालांकि अच्छी ख़बर ये है कि मैच से ठीक पहले मौसम साफ़ हो गया है। लेकिन इसका असर पिच पर पड़ सकता और तेज़ गेंदबाज़ों को मदद मिल सकती है। वैसे माउंट मंगानुई की पिच बल्लेबाज़ों के लिए मूफ़ीद मानी जाती है जिसका उदाहरण भारत के पहले मैच में देखने को मिला था जब टीम इंडिया ने 328 रन स्कोर बोर्ड पर बना डाले थे।

क्या मुंबई के वानखेड़े जैसा नज़ारा माउंट मंगानुई में दिखेगा ?

भारतीय क्रिकेट के फ़ैन्स को अगर किसी चीज़ की सबसे ज़्यादा कमी खलती है तो वह है टीम इंडिया की दीवार राहुल द्रविड़ को मैदान से शानदार विदाई की। जिस तरह से सचिन तेंदुलकर को विदाई मिली थी, राहुल द्रविड़ भी वैसी ही विदाई के हक़दार थे। भले ही उन्हें ये विदाई न मिली हो लेकिन 2011 वर्ल्डकप जीतने के बाद जिस तरह टीम इंडिया ने सचिन को अपने कंधों पर उठा लिया था। कुछ वैसी ही उम्मीद इस टीम इंडिया से भी होगी हालांकि 2 साल पहले भी ये मौक़ा था लेकिन तब विंडीज़ ने ऐसा नहीं होने दिया था। भारतीय क्रिकेट फ़ैंस शनिवार को कुछ ऐसी ही तस्वीरों के लिए दुआ कर रहे होंगे। माउंट मंगानुई में बहुत ज़्यादा पंजाबी रहते हैं लिहाज़ा टीम इंडिया की जीत उन्हें भी भांगड़ा करने का मौक़ा दे सकती है।

भारत संभावितXI: मनजोत कालरा, पृथ्वी शॉ, शुबमन गिल, हार्विक देसाई, रियान पराग, अभिषेक शर्मा, अनुकूल रॉय, कमलेश नागरकोटी, शिवम मावी, इशान पोरेल और शिवा सिंह